भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार (24 मार्च) को जोरदार शुरुआत के बावजूद तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। सेंसेक्स ने कारोबार की शुरुआत में करीब 2% की छलांग लगाई, लेकिन कुछ ही समय में ऊपरी स्तर से लगभग 900 अंकों की गिरावट आ गई।
शुरुआत शानदार, लेकिन जल्दी टूटा उत्साह
सेंसेक्स सुबह 74,212.47 के स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में फिसलकर 73,389.73 के आसपास कारोबार करने लगा। वहीं निफ्टी भी 22,734.55 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। शुरुआती तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली और अनिश्चितता हावी हो गई।
तेजी क्यों नहीं टिक पाई?
1. ईरान-अमेरिका तनाव पर उलझे संकेत
शुरुआत में बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हमले टालने और बातचीत के संकेत से बाजार में सकारात्मक माहौल बना। लेकिन ईरान के बातचीत से इनकार करने के बाद अनिश्चितता फिर बढ़ गई। साथ ही, सऊदी अरब और यूएई के संभावित शामिल होने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
2. कच्चे तेल में अस्थिरता
सोमवार को ब्रेंट क्रूड में 11% की गिरावट आई थी, जिससे राहत मिली थी। लेकिन मंगलवार को एशियाई कारोबार में तेल की कीमतें फिर करीब 4% बढ़ गईं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह बड़ा जोखिम है, जिससे बाजार पर दबाव आया।
3. ग्लोबल संकेतों में कमजोरी
अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद एशियाई बाजारों की तेजी टिक नहीं पाई। होर्मुज स्ट्रेट बंद रहने से एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।
सेक्टर्स और शेयरों का प्रदर्शन
शुरुआती कारोबार में सभी 16 सेक्टर हरे निशान में थे। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई।
- एचडीएफसी बैंक में 1% से ज्यादा उछाल
- श्रीराम फाइनेंस और आयशर मोटर्स 3% तक चढ़े
- एशियन पेंट्स में 2% की तेजी
- बजाज ऑटो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स में 1-3% की बढ़त
इसके अलावा इंडिगो, टाइटन, ट्रेंट, अदाणी एंटरप्राइजेज, अल्ट्राटेक सीमेंट, अपोलो हॉस्पिटल्स और एलएंडटी जैसे शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।
मार्च में अब तक 9.5% गिर चुका बाजार
मार्च महीने में अब तक भारतीय बाजार करीब 9.5% गिर चुका है। इसकी प्रमुख वजहें ऊंचे कच्चे तेल के दाम और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रही हैं।
आगे क्या उम्मीद?
विशेषज्ञों के मुताबिक, निकट अवधि में बाजार में रिकवरी संभव है, खासकर ऑटो, बैंकिंग, एनबीएफसी और ऑयल रिफाइनिंग सेक्टर में। हालांकि, जब तक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर, शुरुआती तेजी के बावजूद वैश्विक अनिश्चितता और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।
