ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने काशी में ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ के गठन की घोषणा की है। यह संगठन सनातन धर्म की मान्यताओं की रक्षा और गौरक्षा के संकल्प को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
श्रीविद्यामठ में हुआ ऐलान
काशी के शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस सेना की रूपरेखा और उद्देश्य पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक संगठित व्यवस्था के तहत कार्य करेगी और इसके संचालन के लिए ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सभा’ का भी औपचारिक गठन किया गया है।
संगठित संरचना और पारंपरिक शस्त्र
इस संगठन के सदस्य पारंपरिक शस्त्र ‘फरसा’ धारण करेंगे। बताया गया है कि यह सेना उन गतिविधियों पर अंकुश लगाने का प्रयास करेगी, जो सनातन धर्म की मान्यताओं के विरुद्ध मानी जाती हैं।
माघ अमावस्या से शुरुआत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की कि आगामी माघ माह की अमावस्या के दिन संगम में ‘चतुरंगिणी सेना’ के साथ सामूहिक स्नान किया जाएगा। इसके बाद इस संगठन की गतिविधियां औपचारिक रूप से शुरू होंगी।
कुल मिलाकर, इस नई पहल को धार्मिक और सामाजिक स्तर पर एक बड़े संगठनात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर आने वाले समय में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
