Magazines cover a wide subjects, including not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

Shopping cart

Subtotal: $4398.00

View cart Checkout

राज्य / उत्तराखंड

अस्कोट वन्यजीव अभ्यारण्य में भीषण आग, 24 घंटे से धधक रहे जंगल; दुर्लभ प्रजातियों पर संकट

Blog Image
903 0

पिथौरागढ़, उत्तराखंड — Askot Wildlife Sanctuary में भीषण जंगल आग ने विकराल रूप ले लिया है। पिछले 24 घंटे से अधिक समय से जंगलों में आग लगातार धधक रही है, जिससे कई हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है। आग की चपेट में आने से दुर्लभ वन्यजीवों पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

तेजी से फैल रही आग, दूर-दूर तक दिख रहा धुआं

अभ्यारण्य के कोली कन्याल क्षेत्र में रविवार को लगी आग ने देखते ही देखते बड़ा रूप ले लिया। चीड़ और बांज के घने जंगलों में फैली आग तेज हवाओं के कारण लगातार बढ़ती जा रही है। पहाड़ियों से उठती ऊंची लपटें और घना धुआं कई किलोमीटर दूर से साफ देखा जा सकता है।

स्थानीय निवासी गुड्डू परिहार के अनुसार, शनिवार शाम से ही जंगल में आग लगी हुई है, जो लगातार फैलती जा रही है और हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

कस्तूरी मृग समेत कई दुर्लभ जीवों पर खतरा

यह अभ्यारण्य विशेष रूप से Kasturi Mrig (कस्तूरी मृग) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है, जो उत्तराखंड का राज्य पशु भी है। इसके अलावा यहां हिम तेंदुआ, भालू और कई दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।

आगजनी से न केवल वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है, बल्कि इन संवेदनशील प्रजातियों के अस्तित्व पर भी खतरा गहरा गया है।

दुर्गम इलाके में राहत कार्य चुनौतीपूर्ण

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और आग बुझाने के प्रयास जारी हैं। वन क्षेत्राधिकारी पूरन सिंह देउपा के मुताबिक, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और तेज हवाएं राहत कार्य में बड़ी बाधा बन रही हैं, जिससे आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है।

बाराकोट में भी आग की घटनाएं

वहीं Champawat जिले के बाराकोट ब्लॉक में भी जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। डोबाभागू, गल्लागांव और तड़ाग क्षेत्रों में शनिवार रात आग भड़क उठी, जिससे व्यापक नुकसान हुआ।

दमकल और वन विभाग की टीमों ने प्रभारी अग्निशमन अधिकारी हंसराज सागर के नेतृत्व में देर रात तक कड़ी मशक्कत कर आग पर काबू पाया।

बढ़ती गर्मी और हवाएं बन रहीं कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान और तेज हवाओं के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post