उज्जैन/जयपुर। राजस्थान की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने महीनों से फरार चल रहे ड्रग तस्करी के सरगना राकेश जाट को आखिरकार उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की यह पूरी कहानी किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है, जहां पुलिस ने वर्दी छोड़ श्रद्धालु का भेष धारण कर आरोपी को मंदिर परिसर से दबोच लिया।
पुलिस के अनुसार, मध्य प्रदेश के नीमच निवासी राकेश जाट लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। राजस्थान की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स कई महीनों से उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन हर बार वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था।
ज्योतिष की सलाह बनी गिरफ्तारी की वजह
सूत्रों के मुताबिक, कारोबार में लगातार आ रही परेशानियों और बढ़ती मुश्किलों से परेशान राकेश जाट ने एक ज्योतिषी से संपर्क किया था। ज्योतिषी ने उसकी कुंडली में काल सर्प दोष होने की बात कही और दोष निवारण के लिए उज्जैन में विशेष पूजा कराने की सलाह दी।
राकेश इसी सलाह पर अमल करने के लिए उज्जैन पहुंचा था। इस बीच एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को उसकी गतिविधियों की गोपनीय जानकारी मिल गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने उज्जैन में डेरा डाल दिया और आरोपी को पकड़ने के लिए नई रणनीति बनाई।
श्रद्धालु बनकर मंदिरों में की तलाश
पुलिसकर्मियों ने इस बार वर्दी और सरकारी वाहनों का इस्तेमाल नहीं किया। टीम आम श्रद्धालुओं के रूप में उज्जैन पहुंची और विभिन्न मंदिरों में दर्शन के बहाने आरोपी की तलाश शुरू कर दी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने लगातार दो दिनों तक शहर के करीब 15 मंदिरों में राकेश जाट की तलाश की। आखिरकार एक मंदिर में वह पंडितों के बीच बैठकर पूजा-अर्चना करता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने बिना किसी हंगामे के उसे हिरासत में ले लिया।
मध्य प्रदेश से राजस्थान तक फैला था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक, राकेश जाट कोई साधारण तस्कर नहीं था। वह मध्य प्रदेश से अफीम एकत्र कर राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में सक्रिय तस्करों तक पहुंचाने का काम करता था। पुलिस उसे ड्रग सप्लाई नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण कड़ी और किंगपिन मानती है।
आईटीआई डिप्लोमा धारक से बना ड्रग तस्कर
राकेश जाट का आपराधिक सफर भी काफी दिलचस्प बताया जा रहा है। उसने चित्तौड़गढ़ से आईटीआई डिप्लोमा किया था और शुरुआती दिनों में अपने परिवार के साथ खेती करता था। करीब एक दशक पहले उसकी मुलाकात एक अफीम ठेकेदार से हुई, जिसके बाद वह धीरे-धीरे मादक पदार्थों की तस्करी के कारोबार में उतर गया।
बताया जाता है कि कुछ वर्षों पहले वह एक बड़े ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तार हुआ था और लगभग 18 महीने जेल में रहा। इसी दौरान उसकी पहचान राजस्थान के कई बड़े तस्करों से हुई, जिसके बाद उसने अपना नेटवर्क और मजबूत कर लिया।
आगे की जांच जारी
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स अब राकेश जाट से पूछताछ कर उसके नेटवर्क, सहयोगियों और तस्करी के पूरे रूट का पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
