लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित सेक्टर-डी में भीषण आग का शिकार हुई तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग को वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था। हालांकि हैरानी की बात यह है कि दो महीने से भी कम समय में यह आदेश रद्द कर दिया गया। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, जिस इमारत में सोमवार को आग लगने से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हुई, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने अवैध निर्माण के मामले में कार्रवाई की थी। जांच के बाद 10 मई 2016 को ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) का आदेश जारी किया गया था, लेकिन 5 जुलाई 2016 को इसे निरस्त कर दिया गया।
1980 में हुआ था आवंटन
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक अलीगंज सेक्टर-डी स्थित करीब 1992 वर्गफुट क्षेत्रफल वाली इस संपत्ति का आवंटन 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार को हायर-परचेज योजना के अंतर्गत किया गया था। उसी वर्ष 4 नवंबर को उन्हें इसका कब्जा सौंप दिया गया।
बाद में वर्ष 2005 में यह संपत्ति सेल डीड के माध्यम से विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुई। इसके बाद 19 जनवरी 2013 को दोनों ने इसे वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया।
अवैध निर्माण पर दर्ज हुई थी FIR
जानकारी के अनुसार, इस भवन का नक्शा 20 अगस्त 2014 को सेल्फ-सर्टिफिकेशन बिल्डिंग प्लान योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। हालांकि बाद में भवन में कथित अनधिकृत निर्माण सामने आने पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेंद्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया था।
जांच पूरी होने के बाद 10 मई 2016 को भवन को गिराने का आदेश जारी किया गया, लेकिन महज दो महीने के भीतर यह आदेश वापस ले लिया गया। अब आग की इस त्रासदी के बाद उस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।
15 लोगों की मौत, कई घायल
सोमवार को इमारत में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। हादसे में झुलसकर कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 9 अन्य लोग घायल हो गए। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है।
मामले में चार आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में भवन मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषार कृष्ण जायसवाल आग प्रभावित इमारत के संयुक्त मालिक थे। मामले की जांच जारी है और प्रशासन ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा शुरू कर दी है।
