जयपुर: राजस्थान में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने 23 और 24 जुलाई को राज्य के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान पूर्वी, दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में सबसे अधिक बारिश होने की संभावना है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में भी अच्छी वर्षा दर्ज की जा सकती है।
मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल मानसून पूरी तरह सक्रिय है और बारिश के लिए मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति (नॉर्मल पोजीशन) पर है, जो बीकानेर, टोंक, गुना और दमोह से होकर गुजर रही है। इसके अलावा उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी विकसित हुआ है। इन दोनों मौसमीय सिस्टम के संयुक्त प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश की संभावना है।
इन जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार 23 और 24 जुलाई को लगभग पूरे राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। वहीं दक्षिणी राजस्थान के कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है।
भारी बारिश की संभावना वाले प्रमुख जिले:
- उदयपुर
- डूंगरपुर
- बांसवाड़ा
- प्रतापगढ़
- सिरोही
- राजसमंद
- चित्तौड़गढ़
इन जिलों के आसपास के क्षेत्रों में भी तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।
पूर्वी राजस्थान में भी बारिश का असर
पूर्वी राजस्थान के कोटा, बारां, झालावाड़, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली और दौसा सहित कई जिलों में भी तेज बारिश का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग का कहना है कि कुछ स्थानों पर बारिश का दौर लगातार बना रह सकता है, जिससे जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है।
लोगों के लिए मौसम विभाग की सलाह
मौसम विभाग ने भारी बारिश को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचने, अनावश्यक यात्रा न करने तथा मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
प्रशासन को भी संभावित जलभराव, यातायात प्रभावित होने और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में सक्रिय मानसून के चलते आने वाले दो दिनों में कई जिलों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है, जिससे किसानों को राहत मिलने के साथ-साथ जलाशयों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
