वैश्विक व्यापार जगत में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने भारत, चीन, यूरोपीय संघ, जापान समेत 60 देशों से होने वाले आयात पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा की गई जांच के बाद उठाया गया है।
अमेरिका का आरोप है कि कई देशों ने अपने यहां जबरन या बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कानूनी और प्रशासनिक कदम नहीं उठाए हैं। इसके कारण अमेरिकी श्रमिकों और उद्योगों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई
USTR ने यह प्रस्ताव अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत तैयार किया है। यह वही प्रावधान है जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के लिए किया था।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अनुसार, जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक न लगाना अमेरिकी श्रमिकों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब इस प्रकार की व्यापारिक असमानता को स्वीकार नहीं करेगा।
टैरिफ का प्रस्तावित ढांचा
अमेरिका ने देशों को दो श्रेणियों में विभाजित किया है:
- 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ उन देशों पर लागू होगा जहां जबरन श्रम से जुड़े आयात पर पूर्ण या आंशिक कानूनी प्रतिबंध मौजूद हैं।
- 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ उन देशों पर लगाया जाएगा जहां इस संबंध में पर्याप्त कानूनी ढांचा या प्रतिबंधात्मक व्यवस्था नहीं है।
भारत को दूसरी श्रेणी में रखा गया है, जिससे उस पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लागू होने की संभावना है।
भारत पर क्या आरोप?
USTR की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जबरन श्रम से जुड़े आयातों पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें प्रभावी रूप से लागू करने में विफल रहा है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ऐसी नीतियां अमेरिकी व्यापारिक हितों को प्रभावित करती हैं।
60 देशों पर हुई जांच
USTR ने 12 मार्च 2026 को 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू की थी। ये देश अमेरिका के कुल आयात का लगभग 99.4 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं।
सूची में भारत और चीन के अलावा ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड और कई खाड़ी देश शामिल हैं। जांच में 54 देशों को कानूनी व्यवस्था और उसके प्रभावी क्रियान्वयन दोनों मामलों में कमजोर पाया गया।
वहीं कनाडा, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मैक्सिको, पाकिस्तान और इक्वाडोर जैसे देशों के पास कानूनी ढांचा तो मौजूद है, लेकिन अमेरिका के अनुसार उसका प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा है।
टेक्सटाइल सेक्टर को मिल सकती है राहत
कड़े टैरिफ प्रस्ताव के बीच अमेरिका ने टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के लिए एक विशेष व्यवस्था का संकेत भी दिया है। प्रस्तावित "टेक्सटाइल मैकेनिज्म" के तहत कुछ देशों से सीमित मात्रा में आयातित कपड़ा और परिधान उत्पादों को कम शुल्क दरों पर अमेरिकी बाजार में प्रवेश की अनुमति मिल सकती है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन देशों को इस राहत का लाभ मिलेगा।
अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम निर्णय लेने से पहले समीक्षा और विचार-विमर्श की प्रक्रिया जारी रहेगी। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ उसके आर्थिक संबंधों पर पड़ सकता है।
