नई दिल्ली। अमेरिकी सरकार द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाने के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये को बड़ी राहत मिली है। ऑफशोर मार्केट में USD/INR नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDF) में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे रुपये को लेकर निवेशकों का सेंटिमेंट मजबूत हुआ है।
वन-मंथ USD/INR NDF के भाव 0.4 प्रतिशत गिरकर 90.28 पर आ गए हैं। इससे पहले ही इसमें करीब 1.3 प्रतिशत की ओवरनाइट गिरावट देखी जा चुकी थी। ट्रेडर्स का कहना है कि अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा के बाद रुपये में यह मजबूती आई है। यह दर बांग्लादेश और पाकिस्तान पर लागू टैरिफ से कम बताई जा रही है।
रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी कूटनीति का असर
बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इसके बदले भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में सहयोग करते हुए रूसी तेल की खरीद में कटौती पर सहमत हो सकता है। इस संभावित कदम से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा है।
रुपये की तेजी को लेकर सतर्कता
हालांकि, बाजार रुपये की इस तेज मजबूती को लेकर सतर्क बना हुआ है। निवेशकों की नजर इस सप्ताह के अंत में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिलने वाले नए संकेतों पर टिकी है। पिछले सप्ताह पेश हुए राष्ट्रीय बजट के बाद बॉन्ड बाजार की नकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए, केंद्रीय बैंक के पास फिलहाल मौद्रिक नीति में ढील देने की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है।
सरकार के रिकॉर्ड स्तर के कर्ज बिक्री कार्यक्रम (डेट सेल प्रोग्राम) के बाद 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड एक साल से अधिक के उच्च स्तर की ओर बढ़ रही है। इससे फिक्स्ड इनकम मार्केट पर दबाव बना हुआ है और करेंसी मार्केट में भी अनिश्चितता बढ़ी है।
शेयर बाजार से मिलेगा रुपये को सपोर्ट
रुपये की आगे की चाल काफी हद तक घरेलू शेयर बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी। करेंसी ट्रेडर्स जोखिम लेने की निवेशकों की क्षमता को परखने के लिए इक्विटी मार्केट पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शेयर बाजार में तेजी बनी रहती है, तो इससे रुपये को और समर्थन मिल सकता है।
इस स्थिति में USD/INR NDF के भाव 90 के स्तर से नीचे भी जा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऑफशोर मार्केट में दिख रही मजबूती का असर जल्द ही ऑनशोर मार्केट में भी दिखाई देगा और रुपये में आगे और सुधार देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, अमेरिका के टैरिफ में कटौती और वैश्विक घटनाक्रमों के चलते रुपये को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन आगे की दिशा RBI की नीति, बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजार की चाल पर निर्भर करेगी।
