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बिजनेस

2 साल से निफ्टी में नहीं मिला रिटर्न, लेकिन इतिहास दे रहा बड़ी तेजी का संकेत! क्या अब बदलेगी बाजार की चाल?

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नई दिल्ली: पिछले दो वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को जबरदस्त उतार-चढ़ाव का अनुभव कराया। इस दौरान निफ्टी ने नए रिकॉर्ड बनाए, बड़ी गिरावट झेली, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी देखा। बावजूद इसके, आज निफ्टी लगभग उसी स्तर पर कारोबार कर रहा है, जहां वह दो साल पहले था।

ऐसे में म्यूचुअल फंड में नियमित SIP करने वाले लाखों निवेशकों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब बाजार ने रिकॉर्ड हाई भी बनाया, तो उनके निवेश पर अपेक्षित रिटर्न क्यों नहीं मिला।

दो साल का उतार-चढ़ाव, लेकिन नतीजा लगभग शून्य

पिछले दो वर्षों के दौरान बाजार में कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिले।

  • सितंबर 2024: निफ्टी ने लगभग 26,277 का रिकॉर्ड हाई बनाया।
  • शुरुआती 2025: वैश्विक टैरिफ विवाद और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी के चलते भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट आई।
  • जनवरी 2026: बाजार ने मजबूत वापसी करते हुए 26,373 का नया लाइफटाइम हाई बनाया।
  • मई-जून 2026: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के कारण बाजार फिर दबाव में आ गया।

इन सभी उतार-चढ़ाव के बाद निफ्टी फिर लगभग वहीं पहुंच गया, जहां वह दो साल पहले था।

'टू-ईयर राउंड ट्रिप' का क्या मतलब?

फंड हाउस Edelweiss ने इस स्थिति को 'टू-ईयर राउंड ट्रिप' नाम दिया है। इसका मतलब है कि जिन निवेशकों ने 2024 की तेजी के दौरान निवेश किया था, उनके पोर्टफोलियो में दो साल बाद भी रिटर्न लगभग शून्य या मामूली नकारात्मक दिखाई दे सकता है।

क्या इतिहास दोहराएगा खुद को?

विश्लेषकों का मानना है कि केवल दो वर्षों तक फ्लैट रिटर्न को देखकर निराश होने की जरूरत नहीं है। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो कई बार ऐसा हुआ है कि निफ्टी ने लगातार दो वर्षों तक बेहद सीमित या शून्य रिटर्न दिया, लेकिन उसके बाद बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय के निवेशकों के लिए ऐसे दौर सामान्य होते हैं। बाजार में अस्थायी सुस्ती के बाद अक्सर नए बुल रन की शुरुआत देखने को मिलती है।

SIP निवेशकों के लिए क्या है संदेश?

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान भी नियमित SIP जारी रखना लंबी अवधि में फायदेमंद रणनीति साबित हो सकता है। जब बाजार कमजोर रहता है, तब SIP के जरिए कम कीमत पर अधिक यूनिट्स खरीदी जाती हैं, जिसका लाभ भविष्य में बाजार की तेजी के दौरान मिल सकता है।

(नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)

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