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महाराष्ट्र

अजित पवार के निधन के बाद विभागों को लेकर सियासी खींचतान तेज, एनसीपी ने ठोका दावा

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मुंबई:
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार के निधन के बाद राज्य की सत्ताधारी महायुति सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एनसीपी ने अजित पवार के पास रहे अहम विभागों पर अपना दावा ठोंक दिया है, जिससे गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर दबाव बनाने में जुटे हैं ताकि उनके विभाग एनसीपी के पास ही बने रहें। एनसीपी के कुछ नेता मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों को लेकर पत्र सौंपने की तैयारी में हैं।

अजित पवार के पास थे ये अहम विभाग

महायुति सरकार के गठन के बाद दिसंबर 2024 में अजित पवार को कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • वित्त विभाग

  • योजना (प्लानिंग) विभाग

  • आबकारी विभाग

इसके अलावा उनके पास अतिरिक्त प्रभार के रूप में:

  • खेल एवं युवा कल्याण विभाग

  • अल्पसंख्यक विकास विभाग

विशेष रूप से वित्त विभाग को सरकार का सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली मंत्रालय माना जाता है।

28 जनवरी को बारामती में हुए विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद ये सभी विभाग फिलहाल रिक्त हो गए हैं। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन विभागों का पुनर्वितरण करना है।

सीएम फडणवीस संभाल सकते हैं अहम जिम्मेदारी

सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस फिलहाल वित्त और योजना विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल सकते हैं। वहीं एनसीपी चाहती है कि ये विभाग पार्टी के कोटे में ही रहें और किसी अन्य सहयोगी दल को न दिए जाएं।

एनसीपी नेताओं का मानना है कि अगर ये विभाग पार्टी से बाहर गए तो यह गठबंधन के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

पहले से ही विभागों के बंटवारे पर असंतोष

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही गठबंधन सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। एनसीपी के कई नेताओं का आरोप रहा है कि अजित पवार गुट को अपेक्षित महत्व नहीं मिला।

अब अजित पवार के अचानक निधन से यह असंतोष और गहरा गया है। पार्टी नेताओं को आशंका है कि उनके प्रभावशाली मंत्रालय हाथ से निकल सकते हैं।

बजट से पहले फैसला जरूरी

राज्य सरकार को फरवरी में बजट पेश करना है। ऐसे में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण बेहद जरूरी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में विभागों के पुनर्वितरण को लेकर गठबंधन के भीतर बातचीत तेज होगी और इससे सरकार की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अगले कदम और एनसीपी की रणनीति पर टिकी हुई है।

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