मुंबई।
भारतीय शेयर बाजारों ने मंगलवार (27 जनवरी) को शुरुआती गिरावट के बाद जोरदार वापसी की। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही अपने दिन के निचले स्तर से उछलकर हरे निशान में आ गए। भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बनी उम्मीदों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली।
कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 449 अंक गिरकर 81,088.59 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया था, जबकि निफ्टी 116 अंक फिसलकर 24,932.55 तक आ गया। हालांकि इसके बाद बाजार ने तेजी पकड़ी और करीब 10 बजे तक सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक की रिकवरी करते हुए 303 अंक की बढ़त के साथ 81,841.32 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी भी पलटकर 25,155.05 पर कारोबार करता दिखा।
शेयर बाजार में तेजी के 5 बड़े कारण
1. भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की उम्मीद
शेयर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत रहे। निवेशकों को उम्मीद है कि इस दिशा में जल्द कोई बड़ा ऐलान हो सकता है। यदि यह समझौता होता है तो इससे निर्यात, निवेश और कॉरपोरेट आय को लंबी अवधि में मजबूती मिलने की संभावना है।
2. रुपये में मजबूती से राहत
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से उबरता नजर आया। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 10 पैसे मजबूत होकर 91.80 के स्तर पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स में नरमी के चलते निवेशकों ने डॉलर में अपनी पोजिशन कवर की, जिससे रुपये को सहारा मिला।
3. ग्लोबल बाजारों से सकारात्मक संकेत
एशियाई शेयर बाजारों में मजबूती का असर भारतीय बाजारों पर भी दिखा। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे।
4. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में नरमी आई। ब्रेंट क्रूड करीब 0.7 फीसदी गिरकर 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। तेल कीमतों में गिरावट से महंगाई के दबाव और व्यापार घाटे को लेकर चिंताएं कम हुईं, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिला।
5. अमेरिकी टैरिफ घटने की उम्मीद
अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ में कटौती को लेकर उम्मीदें भी बाजार के लिए सकारात्मक रहीं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दावोस में संकेत दिया कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद घटाने के बाद टैरिफ हटाए जा सकते हैं। इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ।
तकनीकी स्तरों पर अब भी सतर्कता जरूरी
हालांकि, तकनीकी मोर्चे पर बाजार को लेकर सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह के अनुसार,
“निफ्टी अभी भी अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है। 25,200–25,300 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है, जहां बिकवाली का दबाव आ सकता है। वहीं 25,000 का स्तर अहम सपोर्ट है। इसके नीचे फिसलने पर 24,950–24,900 तक गिरावट संभव है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही बाजार में ओवरसोल्ड स्थिति के कारण अल्पकालिक राहत रैली देखने को मिल सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत है।
