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दिल्ली

सोशल मीडिया बैन के बाद नेपाल में परिवारों की चिंता, दिल्ली और विदेश में रह रहे नेपाली नागरिक परेशान

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नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल में सरकार के कथित भ्रष्टाचार के विरोध में हो रहे युवाओं के आंदोलन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंध के चलते नेपाल के नागरिकों में भारी चिंता का माहौल है। विशेष रूप से दिल्ली और विदेशों में रहने वाले नेपाली नागरिक अपने परिवारों से संपर्क न हो पाने के कारण परेशान हैं। कई लोग अपनों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित हैं।

दिल्ली में रहने वाले नेपाली नागरिक राजन ने बताया कि उनका भाई नेपाल की राजधानी काठमांडू में राष्ट्रपति भवन से कुछ ही दूरी पर रहता है। उन्होंने कहा, “तीन-चार दिन से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। आखिरी बार तीन सितंबर को व्हाट्सऐप कॉल पर बात हुई थी। उसके बाद कोई खबर नहीं है, इसलिए चिंता सता रही है।” राजन ने कहा कि यह नेपाल का अब तक का सबसे बड़ा युवा आंदोलन है, जो सोशल मीडिया बैन से परे जाकर सरकार में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रहा है। उनका भाई होटल में शेफ का काम करता है, जिससे उसकी सुरक्षा को लेकर वे बेहद चिंतित हैं।

इसी तरह फ्रांस में रहने वाली नेपाली नागरिक मेनका ठाकुर ने बताया कि उनका घर काठमांडू घाटी से ज्यादा दूर नहीं है। उन्होंने कहा, “घर वालों की कोई खबर नहीं मिल रही है। मन घबरा रहा है। अगर यह स्थिति बनी रही तो नेपाल में हालात बांग्लादेश जैसे हो सकते हैं। सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। युवाओं का आंदोलन सही है और सरकार को इसे सख्ती से दबाने के बजाय संवाद करना चाहिए।”

असंतोष से बढ़ रहा आंदोलन

जेएनयू के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के प्रोफेसर संजय भारद्वाज ने बताया कि नेपाल में सत्ता विरोधी आंदोलन की संभावना हमेशा बनी रहती है। “राजा को हटाने के बाद से नेपाल में राजनीतिक स्थिरता नहीं रही है। अब तक तीन बार संविधान सभा का गठन हो चुका है। असंतोष के चलते युवाओं में गुस्सा बढ़ रहा है और आंदोलन तेज हो रहा है।”

विदेशों में नेपाली युवाओं में गुस्सा और डर का माहौल

दिल्ली में रहने वाले नेपाली युवाओं ने सोशल मीडिया बैन के बाद सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है। युवाओं ने कहा कि पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाने के वीडियो देखकर वे भयभीत हैं।

नेपाली नागरिक युवराज ने कहा, “सोशल मीडिया बंद होने के बाद एक बार परिवार से बात हुई थी, लेकिन अब संपर्क नहीं हो पा रहा है। आंदोलन में शामिल दोस्तों से भी खबर नहीं मिल रही।” वहीं चंद्रा नामक अन्य नेपाली नागरिक ने कहा, “सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। सोमवार को युवाओं ने सड़कों पर विरोध किया। घरवालों से संपर्क नहीं हो पा रहा, इसलिए हम परेशान हैं।”

नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता और सोशल मीडिया प्रतिबंध का असर अब देश से बाहर रहने वाले नागरिकों पर भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है, जबकि युवाओं का आंदोलन और तेज होता जा रहा है।

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