कीमती धातुओं में कारोबार करने वाले ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर लगाया गया अतिरिक्त मार्जिन वापस लेने का फैसला किया है। यह निर्णय गुरुवार, 19 फरवरी से प्रभावी हो गया है।
एक्सचेंजों द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए गोल्ड फ्यूचर्स पर 3 प्रतिशत और सिल्वर फ्यूचर्स पर 7 प्रतिशत का अतिरिक्त मार्जिन लगाया गया था। अब बाजार में उतार-चढ़ाव कम होने और कीमतों में कुछ स्थिरता आने के बाद इसे पूरी तरह हटा दिया गया है। क्लियरिंग मेंबर्स को इस बदलाव के अनुसार अपनी पोजीशन समायोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्यों लगाया गया था अतिरिक्त मार्जिन?
सोना और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम प्रबंधन के तहत मार्जिन बढ़ाया गया था। जब बाजार में वोलैटिलिटी ज्यादा होती है, तब एक्सचेंज ट्रेडिंग से जुड़े जोखिम को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त मार्जिन लगाते हैं।
ट्रेडर्स को क्या होगा फायदा?
अतिरिक्त मार्जिन हटने से फ्यूचर्स ट्रेडिंग के लिए कम पूंजी की आवश्यकता होगी, जिससे ट्रेडिंग कॉस्ट घटेगी। इससे बाजार में वॉल्यूम बढ़ने और नए पार्टिसिपेंट्स के आने की संभावना भी है।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में कीमतों का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 19 फरवरी को सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। पिछले सत्र में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी के बाद स्पॉट गोल्ड करीब 0.4 प्रतिशत फिसल गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी 0.6 प्रतिशत की गिरावट रही। वहीं चांदी की कीमत एशियाई कारोबार के दौरान करीब 76 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।
घरेलू बाजार में भी हाल के दिनों में सोना-चांदी में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया था, ऐसे में अतिरिक्त मार्जिन हटाने का फैसला बाजार के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, इस कदम से कमोडिटी मार्केट में कारोबार की लागत घटेगी और ट्रेडिंग गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
