रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बघेल ने कहा कि जब-जब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर लौटते थे, कुछ ही दिनों बाद उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य एजेंसियों के छापे पड़ जाते थे। बघेल ने इसे दबाव की राजनीति करार दिया है।
यह बयान उन्होंने कांग्रेस के पूर्व नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के यूट्यूब चैनल पर एक बातचीत के दौरान दिया। बघेल ने कहा कि एक-दो बार उन्हें दिल्ली बुलाया गया था, जहां उनसे कहा गया कि उनकी “मदद कैसे की जा सकती है”, लेकिन उस समय वह यह नहीं समझ पाए कि इसके पीछे मंशा क्या है।
बघेल के अनुसार, “जब भी मैं उनसे मिलकर आता था, तो चार-पांच या आठ दिन के भीतर फिर से छापा पड़ जाता था। एक बार तो मैंने प्रधानमंत्री जी को फोन करके यह तक कह दिया कि आपने तो कहा था मदद करूंगा, लेकिन यहां तो रेड डलवा दी गई।” उन्होंने दावा किया कि इस पर प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से बात करने का भरोसा दिया था।
इंटरव्यू के दौरान कपिल सिब्बल ने यह संभावना जताई कि छापों के जरिए बघेल पर दबाव बनाकर उन्हें भारतीय जनता पार्टी में शामिल कराने की कोशिश हो सकती है। इस पर बघेल ने कहा कि यह बात उन्हें काफी बाद में समझ में आई। उन्होंने कहा कि सीधे तौर पर उनसे कभी कुछ नहीं कहा गया, लेकिन इशारे जरूर थे।
भूपेश बघेल ने यह भी बताया कि उनसे यह पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं और उनके भरोसेमंद अधिकारी कौन हैं। उन्होंने कहा, “मैं विपक्ष में था और विपक्ष का धर्म निभाते हुए सरकार की आलोचना भी करता था। इसके बावजूद मुझे बुलाकर सहयोग की बात की जाती थी, जो मेरे लिए हैरानी की बात थी।”
बघेल का आरोप है कि क्योंकि वह किसी तरह की ‘कमिटमेंट’ करके नहीं लौटते थे, इसलिए मुलाकात के कुछ दिनों बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई शुरू हो जाती थी। उन्होंने कहा कि अब जाकर उन्हें समझ आया कि यह सब दबाव बनाने और राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति का हिस्सा था।
