मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने बुधवार को इजरायल पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए, जिससे तेल अवीव समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और सायरन बज उठे। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है।
लारीजानी की हत्या के बाद ईरान का जवाब
ईरान ने यह हमला अपने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की मौत के बाद किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक, ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई उसके वरिष्ठ नेता अली लारीजानी की हत्या का बदला है, जिन्हें देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था।
आधुनिक मिसाइलों का इस्तेमाल
IRGC के बयान के अनुसार, हमलों में खोर्रमशहर-4, कद्र, इमाद और खैबर शिकन जैसी उन्नत मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इन मल्टी-वॉरहेड मिसाइलों ने इजरायल के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया।
इजरायल और अरब देशों पर असर
इजरायल की आपातकालीन सेवा ‘मेगेन डेविड एडोम’ के अनुसार, तेल अवीव के पास रमात गन इलाके में दो लोगों की मौत की खबर है। इसके अलावा, सऊदी अरब, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
शीर्ष नेताओं की मौत से बढ़ा संकट
इससे पहले इजरायली हमलों में ईरान के दो वरिष्ठ अधिकारी—अली लारीजानी और जनरल गुलाम रजा सुलेमानी—मारे गए थे। लारीजानी जहां सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व सचिव थे, वहीं सुलेमानी ‘बासिज’ बल के प्रमुख थे। उनकी मौत को ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त रुख
इस बीच, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करेगा। यह जलमार्ग दुनिया के तेल परिवहन के लिए बेहद अहम है, और इसके प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन संकट गहरा सकता है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी समय स्थिति और बिगड़ सकती है। मध्य पूर्व में बढ़ता यह टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
